Wednesday, March 2, 2016

इंटेलेक्चुअल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट

                       इंटेलेक्चुअल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट 

पड़ोस के शर्मा जी आज शाम नुक्कड़ पर टकरा गए , उनके हाव भाव देखकर हम भी गच्चा खा गए , न जाने क्यों पर कुछ नाक चढ़ा कर वो  यूँ बोले 
" हैल्लो मिस्टर तोमर ,हाउ आरर्  यू ? "
कभी शर्मा जी के मुंह से एक अंग्रेजी का शब्द न सुना  था, आज पूरा शब्दकोष रटकर आये थे , तो लाज़मी है हमारा हतप्रभ रह जाना !
फिर भी हमने खुद को सहेजा और उनसे पूछा  "कुछ अलग ही रंग में नज़र आ रहे हो शर्माजी  , क्या बात है ?" 

"हम इंटेलेक्चुअल हो गये हैं " तपाक से उनका जवाब आया , "देश असहिष्णुता ,कम्यूनलिस्म का शिकार हो  गया है ,'फ्रीडम ऑफ़ स्पीच' को दबाया जा रहा है " 

हम बोले - "पर शर्माजी  आप तो कभी इन सब चीज़ों में 'इंटरेस्टेड '  नहीं थे ? " 

"देखिये तोमर महोदय , हमारा बचपन का सपना था की हम बुद्धिजीवी कहलायें ,सो हमने 'खालिद इंटेलेक्चुअल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट ज्वाइन  कर लिया है , आपने नहीं देखा ? जवाहर नगर की गली नो. 124A  में कन्हैया जी के मंदिर के समीप ही खुला है " 

इसपर हमारी जिज्ञासा बढ़ी , तो हमने पूछा " शर्मा जी ,इंटेलेक्चुअल तो हम भी बनना चाहते हैं, थोड़े टिप्स हमें भी दे दीजिये। 

यह सुनते ही शर्मा जी ने सीना फुलाया और गर्वीली आवाज़ में बोले " तोमर जी , पहले तो आप इंस्टिट्यूट ज्वाइन कीजिये , फिर यह देशभक्ति जैसी खोखली दलीलें अपने दिल से निकालिये , 'फ्रीडम ऑफ़ स्पीच ' ट्रेंडिंग टॉपिक है , सरकार के पक्ष में बोलोगे तो समझदार नहीं , चाटुकार कहलाओगे , और आप तो देश के हज़ार टुकड़े करने वालों का केस भी लड़ सकते हो, वकील जो हो , गिरफ्तार बच्चों की  'हीरो' वाली इमेज बनाने में योगदान दो , जो भी आम जनता की राय हो ,उससे उलट राय रखो , फिर चाहे वो एंटी नेशनल ही क्यों न हो ,आफ्टर आल फ्रीडम ऑफ़ स्पीच है भाई , और हाँ सबसे ज़रूरी बात , थोड़ी अंग्रेजी सीख लो , लेजिटिमेसी मिलती  है यू सी , बस इतना करो , इंटेलेक्चुअल अपने आप कहलाओगे " 


शर्मा जी की  ज्ञान की बातें सुनकर मेरे भी ज्ञान के चक्षु खुल गए , उन्हें राम राम करके घर आया तो रात भर बस यही सोचते हुए करवटें बदलता रहा , के उनकी  बात मानके कैसे ही हिट हो जाऊं , देश भक्ति तो बस गरीबी और आम आदमी बनाती  है , या सरहद पर गोली खिलाती है , मौज तो इंटेलेक्चुअल होने में ही है , सुबह उठते ही इंस्टिट्यूट का फारम लाऊंगा , बस अब किसी तरह  यह देशद्रोही नींद आजाये !!!!

8 comments:

  1. Ranjan this is awesome :-) mazaa aa gaya...resonates with my views! It's too mainstream these days to agree easily or be happy with everything ... Everyone has suddenly started disagreeing with everything, without putting their minds into it! Also Modi bashing is IN, anyone who likes him or supports him is seen as RSS :-/ that's unfair for citizens like me!
    Keep writing sattire

    ReplyDelete
  2. Thanku so much for the kind words Rozita, very true, people having views is good for a country,but making views based on half or zero knowledge and that too based on ideologies is always dangerous... and thats what is happening to us.... if there is intolerance, we all are responsible for it... we may call it 'intellectual intolerance ' :p coz everyone wants to b one! And I'll keep writing till ppl like you read and appreciate my stuff :) thanx again

    ReplyDelete
  3. Amazingly portrayed. This is the issue. Many people don't even know what they are doing and saying rather they just follow the herd! Such bfuly written tomar ji. Very nice.

    ReplyDelete
  4. Amazingly portrayed. This is the issue. Many people don't even know what they are doing and saying rather they just follow the herd! Such bfuly written tomar ji. Very nice.

    ReplyDelete
  5. भाई बहुत अच्छा लेख लिखा आपने ..पढ़ कर अच्छा लगा

    ReplyDelete